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साझेदारी
Delhi दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को लेकर अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल और अलास्का में पुतिन और ट्रंप की ऐतिहासिक बैठक ने भी इस जंग को खत्म करने में कोई ठोस सफलता नहीं दी। इस बीच, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के संभावित भारत दौरे की खबरों ने शांति की दिशा में नई उम्मीदें जगाई हैं। यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने जानकारी दी कि जेलेंस्की जल्द ही भारत का दौरा कर सकते हैं। हालांकि, इस दौरे की तारीख अभी निश्चित नहीं हुई है और दोनों देश तारीख तय करने में लगे हुए हैं। पिछले साल अगस्त में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन का दौरा किया था, तब उन्होंने जेलेंस्की को भारत आने का निमंत्रण दिया था। अब भारत और यूक्रेन इस दौरे की तारीख पर अंतिम बातचीत कर रहे हैं।
जेलेंस्की के संभावित दौरे के अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इसी साल भारत आने वाले हैं। पुतिन का दौरा साल के अंत में होने की संभावना है। भारत और रूस के बीच हमेशा मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते रहे हैं। इसके साथ ही भारत और यूक्रेन के बीच भी द्विपक्षीय संबंध अच्छे रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों नेताओं के दौरे के दौरान कुछ ऐसा फॉर्मूला तय किया जा सकता है, जिससे रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने की दिशा में पहल की जा सके। यूक्रेन के राजदूत पोलिशचुक ने कहा, “भारत और यूक्रेन के बीच भविष्य की रणनीतिक साझेदारी पर जो घोषणाएं हुई हैं, उनमें बहुत संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति जेलेंस्की को भारत आने का निमंत्रण दिया है और दोनों पक्ष इस पर काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की निश्चित रूप से भारत आएंगे। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।” उन्होंने बताया कि दोनों देश मिलकर सही तारीख तय करने का प्रयास कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के मजबूत द्विपक्षीय संबंध, दोनों देशों के नेताओं के दौरे और बातचीत की प्रक्रिया शांति की संभावनाओं को बढ़ा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी और जेलेंस्की पहले भी कई बार मिले हैं और उनके बीच विश्वासपूर्ण संवाद शांति की दिशा में नए प्रस्ताव तैयार करने में सहायक हो सकता है। इस स्थिति में यह कहा जा सकता है कि दिल्ली शांति की संभावनाओं का केंद्र बन सकता है, जहां रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत और समझौते की संभावनाओं पर विचार किया जा सके। हालांकि, इसके लिए दोनों देशों की राजनीतिक और कूटनीतिक इच्छाशक्ति आवश्यक है।
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